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मंदिर में पूजा के दौरान भक्ति कैसे बढ़ाएं?

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नारद भक्तिसूत्र: सांसारिक त्याग और सत्संग — भक्ति के दो मुख्य पोषक। नवधा भक्ति (भागवत 7.5.23): श्रवण, कीर्तन, स्मरण, पादसेवन, अर्चन, वंदन, दास्य, सख्य, आत्मनिवेदन। पूजा में: भाव-आरोपण, गुण-कीर्तन, और निरंतर अभ्यास — भक्ति बढ़ती है।

  1. 1श्रवण — भगवान की कथाएं सुनना (सत्संग, प्रवचन)
  2. 2कीर्तन — भगवान का गुणगान करना
  3. 3स्मरण — निरंतर भगवान का नाम मन में रखना
  4. 4पादसेवन — भगवान के चरणों की सेवा
  5. 5अर्चन — पूजा-उपचार (षोडशोपचार)
  6. 6वंदन — प्रणाम, स्तुति
  7. 7दास्य — भगवान का दास भाव रखना
  8. 8सख्य — भगवान को परम मित्र मानना
  9. 9आत्मनिवेदन — सम्पूर्ण आत्म-समर्पण
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मंदिर पूजा

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