मंदिर में स्वर्ण दान करने का क्या विधान है?
की चेकलिस्ट
स्वर्ण दान: महादान ('हिरण्यदानं परं')। प्रकार: देवता आभूषण (मुकुट/हार), हुंडी में, स्वर्ण मूर्ति। विधि: संकल्प (नाम+गोत्र) → पुजारी/हुंडी → रसीद अवश्य। फल: सूर्यलोक, दीर्घायु, यश, पापनाश। सावधानी: शुद्ध स्वर्ण, हृदय से (दिखावा नहीं), सामर्थ्यानुसार। 80G = कर लाभ।
- 1शुभ मुहूर्त (ज्योतिषी/पंचांग)
- 2स्नान + शुद्ध वस्त्र
- 3मंदिर में देवता के सामने
- 4संकल्प: 'मैं [नाम], [गोत्र], [देवता] को यह स्वर्ण अर्पित करता/करती हूँ'
- 5पुजारी के हाथों या हुंडी में समर्पित
- 6रसीद/प्रमाण अवश्य लें
- 7प्रसाद ग्रहण
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श्रेणी
मंदिर दान
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