मंत्र जप में संक्रांति का क्या विशेष महत्व है?
की चेकलिस्ट
सूर्य राशि परिवर्तन = ऊर्जा transition → जप अधिक ग्रहण। पुण्यकाल (कई गुना)। गायत्री/सूर्य विशेष। मकर सर्वप्रमुख। ±3 घंटे पुण्यकाल। स्नान→दान→जप।
- 1सूर्य ऊर्जा: संक्रांति = सूर्य नई राशि में → ऊर्जा transition → मंत्र जप = अधिक ग्रहण।
- 2पुण्यकाल: संक्रांति = विशेष पुण्यकाल — स्नान/दान/जप = कई गुना फल।
- 3गायत्री विशेष: सूर्य = गायत्री देवता → संक्रांति पर गायत्री जप = अत्यंत फलदायी।
- 412 संक्रांतियां/वर्ष: मकर (सबसे प्रमुख), मेष, कर्क, तुला = चार प्रमुख।
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