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मंत्र जप से आध्यात्मिक जागरण कैसे होता है?

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गीता (10.10-11): निरंतर प्रीतिपूर्वक जप करने वाले को भगवान स्वयं ज्ञान-दीप देते हैं। प्रक्रिया: चित्त-शुद्धि → शक्तिपात → कुण्डलिनी जागरण → स्वरूप-बोध। जागरण के लक्षण: भगवान में परम प्रीति, वैराग्य, सर्वत्र ईश्वर-दर्शन, अकारण आनंद। जागरण एक प्रक्रिया है, घटना नहीं।

  1. 1जो निरंतर प्रीतिपूर्वक भजन करते हैं — उन्हें मैं वह बुद्धि-योग देता हूँ जिससे वे मुझे पाते हैं। और उनके अज्ञान के अंधकार को मैं ज्ञान-दीप से नष्ट करता हूँ।
  2. 2भगवान में परम प्रीति जो रुकती नहीं
  3. 3संसार के प्रति निर्लिप्तता (आसक्ति नहीं)
  4. 4सभी प्राणियों में ईश्वर-दर्शन
  5. 5अकारण आनंद
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