पितृ दोष निवारण का सबसे सरल उपाय?
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सबसे सरल: दैनिक तिल-जल तर्पण (दक्षिण दिशा, 'ॐ पितृभ्यो नमः')। कौवे+गाय को रोटी। शनिवार पीपल जल। गीता 15वाँ अध्याय पाठ। बुजुर्गों की सेवा। सबसे प्रभावी: गया पिंडदान।
- 1तिल-जल तर्पण — प्रतिदिन स्नान के बाद दक्षिण दिशा में मुख कर, लोटे में काले तिल + जल लें, *'ॐ पितृभ्यो नमः'* बोलकर 3 बार जल अर्पित करें।
- 2शनिवार — पीपल पर जल + सरसों तेल चढ़ाएँ।
- 3अमावस्या — विशेष तर्पण + ब्राह्मण भोजन।
- 4पितृ पक्ष में विधिवत श्राद्ध अवश्य करें।
- 5कौवे को रोटी — प्रतिदिन कौवे को भोजन दें।
- 6गाय को ग्रास — प्रतिदिन गाय को हरा चारा/रोटी।
- 7गीता 15वाँ अध्याय — नित्य पाठ (पितृ मोक्ष)।
- 8पितरों का स्मरण — सच्चे मन से पितरों को याद कर क्षमा माँगें।
- 9बुजुर्गों की सेवा — जीवित बुजुर्गों का सम्मान = सबसे बड़ा पितृ तर्पण।
- 10वट वृक्ष को जल चढ़ाना।
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