शिवलिंग की प्राण प्रतिष्ठा कैसे होती है, विधि सहित?
की चेकलिस्ट
नर्मदेश्वर/स्वयंभू = प्राण प्रतिष्ठा अनावश्यक। मनुष्य निर्मित = अनिवार्य। विधि: शुभ मुहूर्त → भूमि शुद्धि → गणेश-नवग्रह पूजन → कलश स्थापना → वैदिक मंत्रों से प्राण आवाहन → षोडशोपचार पूजन → हवन → पूर्णाहुति। योग्य पुरोहित से ही कराएं। घर के लिए नर्मदेश्वर सर्वोत्तम विकल्प।
- 1नर्मदेश्वर (बाणलिंग): प्राण प्रतिष्ठा अनावश्यक — स्वयंभू, स्वतः सिद्ध।
- 2स्वयंभू शिवलिंग: अनावश्यक — शिव स्वयं विराजमान।
- 3मनुष्य निर्मित शिवलिंग: (पत्थर, धातु, स्फटिक आदि) — प्राण प्रतिष्ठा अनिवार्य।
- 4शुभ मुहूर्त का चयन (ज्योतिषी से परामर्श)।
- 5स्थान की शुद्धि — गंगाजल छिड़काव, भूमि पूजन।
- 6शिवलिंग को शुद्ध जल, पंचगव्य से स्नान कराएं।
- 7यह विधि अत्यंत जटिल है — स्वयं करने का प्रयास न करें।
- 8योग्य, अनुभवी वैदिक पुरोहित से ही कराएं।
- 9प्राण प्रतिष्ठा के बाद शिवलिंग की नित्य पूजा अनिवार्य हो जाती है।
- 10घर के लिए नर्मदेश्वर शिवलिंग सर्वोत्तम विकल्प है — प्राण प्रतिष्ठा की जटिलता से बचा जा सकता है।
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शिव पूजा विधि
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