शिवलिंग पर अक्षत चढ़ाने का क्या विधान है?
की चेकलिस्ट
शिवलिंग पर केवल साबुत (अखंडित) अक्षत ही अर्पित करें — टूटे चावल वर्जित (शिव पुराण)। जलाभिषेक और चंदन तिलक के बाद दाहिने हाथ से चढ़ाएं। बिना कुमकुम/हल्दी के सादे श्वेत अक्षत प्रयोग करें। रुद्राभिषेक में 108 दाने का विधान। अक्षत पूर्णता और समृद्धि का प्रतीक है।
- 1पूजा के दौरान पहले जलाभिषेक और पंचामृत अभिषेक करें।
- 2चंदन का तिलक लगाएं।
- 3फिर अक्षत शिवलिंग पर अर्पित करें।
- 4अक्षत दोनों हाथों से या दाहिने हाथ से अर्पित करें।
- 5'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जप करते हुए चढ़ाएं।
- 6सुख-समृद्धि और धन वृद्धि।
- 7परिवार में शांति और एकता।
- 8पूजा की पूर्णता — अक्षत के बिना पूजा अधूरी मानी जाती है।
- 9चावल श्वेत और स्वच्छ होने चाहिए।
- 10कुछ परंपराओं में अक्षत पर कुमकुम या हल्दी लगाकर अन्य देवताओं को अर्पित किया जाता है, किन्तु शिवलिंग पर बिना कुमकुम/हल्दी के सादे श्वेत अक्षत ही चढ़ाएं (क्योंकि शिवलिंग पर सिंदूर/हल्दी वर्जित है)।
- 11चावल के 108 दाने गिनकर रुद्राभिषेक में अर्पित करने का विशेष फल बताया गया है।
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शिव पूजा विधि
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