शिवलिंग पर दूध क्यों चढ़ाया जाता है?
की चेकलिस्ट
समुद्र मंथन में हलाहल विष पीने से शिव का कंठ जलने लगा था — देवताओं ने शीतल दूध से अभिषेक किया। तभी से दूध चढ़ाने की परंपरा है। दूध सात्विकता, पवित्रता और चंद्रमा का प्रतीक है।
- 1समुद्र मंथन की कथा: जब समुद्र मंथन से हलाहल विष निकला, तब सृष्टि की रक्षा के लिए भगवान शिव ने उस विष को अपने कंठ में धारण किया। इससे उनका कंठ नीला (नीलकंठ) हो गया और शरीर जलने लगा। तब देवताओं ने शीतल दूध और जल से उनका अभिषेक किया जिससे उनकी जलन शांत हुई। तभी से दूध चढ़ाने की परंपरा है।
- 2शिव पुराण का कथन: शिव पुराण में वर्णित है कि दूध शुद्धता, सात्विकता और पवित्रता का प्रतीक है — शिव को ये तीनों अत्यंत प्रिय हैं।
- 3पंचामृत का भाग: दूध पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) का प्रथम और सर्वप्रमुख घटक है।
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