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शिवलिंग पर केतकी का फूल चढ़ाना क्यों वर्जित माना गया है?

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शिव पुराण (विद्येश्वर संहिता): ब्रह्मा-विष्णु के श्रेष्ठता विवाद में शिव ज्योतिर्लिंग रूप में प्रकट हुए। ब्रह्मा जी ने ऊपरी छोर देखने का झूठ बोला — केतकी ने झूठी गवाही दी। शिव ने क्रुद्ध होकर केतकी को श्राप दिया — शिव पूजा में सदा के लिए वर्जित। यह सर्वमान्य निषेध है, निर्णयसिंधु में भी पुष्टि मिलती है।

  1. 1ब्रह्मा जी को श्राप दिया कि पृथ्वी पर उनकी पूजा नहीं होगी (इसीलिए ब्रह्मा जी के अत्यंत कम मंदिर हैं)।
  2. 2केतकी के फूल को श्राप दिया कि वह कभी भी शिव पूजा में स्वीकार नहीं होगा।
  3. 3यह निषेध सर्वमान्य है — किसी भी शैव परंपरा या सम्प्रदाय में केतकी शिव को अर्पित नहीं होती।
  4. 4निर्णयसिंधु ग्रंथ में भी स्पष्ट लिखा है कि विष्णु-प्रिय सभी पत्र-पुष्प शिव को चढ़ सकते हैं, 'केवल केतकी का निषेध' है।
  5. 5केतकी अत्यंत सुगंधित फूल है, किन्तु असत्य का साथ देने के कारण शिव-पूजा से वंचित हुआ — यह सत्य के महत्व का सन्देश भी है।
  6. 6अन्य देवी-देवताओं की पूजा में केतकी वर्जित नहीं है।
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शिव पूजा नियम

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