तांत्रिक साधना में कपाल का क्या उपयोग है?
की चेकलिस्ट
कापालिक: पात्र (वैराग्य+भय नाश), काली पूजा, ब्रह्मकपाल (शिव चिन्ह)। दार्शनिक: मृत्यु बोध, अहंकार नाश, अद्वैत ('सबमें शिव')। सामान्य = कभी नहीं। अघोर/कापालिक। कानूनी।
- 1भोजन/पान पात्र: कापालिक = कपाल में भोजन/मद्य — वैराग्य + भय नाश।
- 2काली पूजा: काली = कपाल माला + कपाल पात्र — रक्त/मद्य अर्पण।
- 3ब्रह्मकपाल: ब्रह्मा का पांचवां शिर = शिव ने काटा → कपाल = शिव चिन्ह।
- 4दार्शनिक: 'यह खोपड़ी भी एक दिन मेरी' = वैराग्य, मृत्यु बोध, अहंकार नाश।
- 5अघोरी: 'सबमें शिव' — कपाल = शुद्ध/अशुद्ध भेद नहीं = अद्वैत।
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