तंत्र साधना के दौरान दीपक क्यों जलाते हैं?
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शारदातिलक: दीपक = ज्ञान-स्वरूप, तेज-तत्व का साधन। पाँच कारण: तेज-तत्व आह्वान, नकारात्मक शक्तियों का निष्कासन, देवता-आह्वान, साधक की एकाग्रता (त्राटक), साधना-स्थल शुद्धि। देवता-अनुसार: काली (सरसों तेल), लक्ष्मी (घी), भैरव (तिल तेल)। साधना में दीपक बुझना = बाधा-संकेत।
- 1दीपक ज्ञान-स्वरूप है और देवता का प्रकाशक है। वह तेज-तत्व का साक्षात् साधन है।
- 2काली/उग्र देवी: सरसों के तेल का दीपक (कृष्णवर्ण) — अमावस्या को
- 3लक्ष्मी: घी का दीपक — पूर्णिमा को
- 4भैरव: तिल के तेल का दीपक — रविवार को
- 5सरस्वती: घी का दीपक — सफेद बाती
- 6गणपति: घी का दीपक — बुधवार को
- 7सामान्य तांत्रिक साधना: पाँच मुखी दीपक — पाँच तत्वों का प्रतीक
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