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तुलसी के पत्ते रविवार और एकादशी को क्यों नहीं तोड़ते?

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रविवार: सूर्य देव का दिन, तुलसी विश्राम, जल-दीपक-पत्ते तीनों वर्जित। एकादशी: विष्णु की पवित्र तिथि, तुलसी को कष्ट न दें। द्वादशी पर सर्वाधिक कठोर निषेध (ब्रह्म हत्या सम)। उपाय: दशमी/शनिवार को पहले तोड़ रखें — तुलसी बासी नहीं होती।

  1. 1सूर्य देव का दिन: रविवार सूर्य नारायण को समर्पित है। सूर्य देव भगवान विष्णु की ही अभिव्यक्ति हैं। इस दिन तुलसी माता विश्राम करती हैं — इसलिए पत्ते तोड़ना, जल अर्पित करना और दीपक जलाना तीनों वर्जित हैं।
  2. 2पौराणिक मान्यता: कहा जाता है कि रविवार को तुलसी सूर्य देव की आराधना में लीन रहती हैं। इस समय उन्हें कष्ट देना (पत्ते तोड़ना) अशुभ माना गया है।
  3. 3शास्त्रीय विधान: शास्त्रों में स्पष्ट कहा गया है कि रविवार को तुलसी और दूर्वा — दोनों न तोड़ें।
  4. 4विष्णु को समर्पित: एकादशी भगवान विष्णु की पवित्र तिथि है। तुलसी भगवान विष्णु की अत्यंत प्रिय हैं। इस दिन तुलसी की विशेष पूजा होती है — उन्हें कष्ट देना (पत्ते तोड़ना) उचित नहीं।
  5. 5द्वादशी का कठोर निषेध: विशेष रूप से एकादशी के अगले दिन द्वादशी पर तुलसी तोड़ने का सर्वाधिक कठोर निषेध है। कुछ ग्रंथों में इसे 'ब्रह्म हत्या' समान पाप बताया गया है।
  6. 6उपवास की पवित्रता: एकादशी व्रत के दिन तप-संयम का वातावरण रहता है। तुलसी को भी इस पवित्र दिन विश्राम दिया जाता है।
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