वास्तु दोष निवारण यंत्र कैसे प्रयोग करें?
की चेकलिस्ट
वास्तु/श्री/नवग्रह यंत्र। ईशान कोण/मुख्य द्वार। गंगाजल शुद्धि + प्राण प्रतिष्ठा। प्रतिदिन दीपक + 11 जप। ताम्रपत्र/पंचधातु। दीपावली/नवरात्रि स्थापना।
- 1स्थान: घर/कार्यालय का ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) या मुख्य द्वार।
- 2स्थापना: शुभ मुहूर्त (गृहप्रवेश/दीपावली/नवरात्रि)।
- 3शुद्धि: गंगाजल + पंचामृत + 'ॐ' 108 बार।
- 4प्राण प्रतिष्ठा: पुरोहित/गुरु द्वारा।
- 5प्रतिदिन: दीपक + 'ॐ नमः शिवाय' / 'ॐ श्रीं' 11 बार।
- 6सामग्री: ताम्रपत्र सर्वोत्तम। पंचधातु भी।
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यंत्र साधना
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