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वास्तु पूजा में नवग्रह स्थापना कैसे करें?

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नवग्रह स्थापना: यंत्र/मण्डल (केन्द्र=सूर्य, चारों दिशा+कोण) → प्रत्येक ग्रह पर सम्बंधित पुष्प-मंत्र → हवन (108×9 आहुति, सम्बंधित समिधा) → नवग्रह स्तोत्र। उद्देश्य: वास्तु+ग्रह दोष शांति।

  1. 1नवग्रह यंत्र/मण्डल: चौकी पर लाल/पीला कपड़ा बिछाएँ। नवग्रह यंत्र (धातु/कागज) स्थापित करें। या नौ छोटे बर्तनों में सप्तधान्य (सात अनाज) रखकर नवग्रह प्रतीक।
  2. 2ग्रह क्रम: केन्द्र = सूर्य। पूर्व = शुक्र, दक्षिण-पूर्व = मंगल, दक्षिण = राहु, दक्षिण-पश्चिम = शनि, पश्चिम = चन्द्र, उत्तर-पश्चिम = बुध, उत्तर = केतु, उत्तर-पूर्व = गुरु।
  3. 3पूजन: प्रत्येक ग्रह पर सम्बंधित रंग का पुष्प, अक्षत, चन्दन, धूप, दीपक। बीज मंत्र सहित जल अभिषेक।
  4. 4हवन: नवग्रह मंत्रों से 108-108 आहुतियाँ। सम्बंधित समिधा (सूर्य=मदार, चन्द्र=पलाश, मंगल=खैर, बुध=अपामार्ग, गुरु=पीपल, शुक्र=गूलर, शनि=शमी, राहु=दूर्वा, केतु=कुश)।
  5. 5नवग्रह स्तोत्र: 'आदित्याय च सोमाय मंगलाय बुधाय च। गुरुशुक्रशनिभ्यश्च राहवे केतवे नमः।'
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