वास्तु शास्त्र और तंत्र शास्त्र में क्या जुड़ाव है?
की चेकलिस्ट
वास्तु और तंत्र दोनों ऊर्जा विज्ञान पर आधारित हैं। यंत्र स्थापना, मंत्र, वास्तु पुरुष मंडल, दिक्पाल साधना — ये दोनों शास्त्रों के मिलन बिंदु हैं। दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं।
- 1ऊर्जा सिद्धांत — दोनों शास्त्र ब्रह्मांडीय ऊर्जा के प्रवाह और संतुलन पर आधारित हैं। वास्तु भवन की ऊर्जा को, तंत्र मानव शरीर और परिवेश की ऊर्जा को नियंत्रित करता है।
- 2यंत्र स्थापना — वास्तु दोष निवारण में तांत्रिक यंत्रों (श्रीयंत्र, वास्तु यंत्र, नवग्रह यंत्र) की स्थापना की जाती है — यह वास्तु और तंत्र का सीधा मिलन है।
- 3मंत्र और अनुष्ठान — भूमि पूजन, गृहप्रवेश और वास्तु शांति में तांत्रिक मंत्रों का प्रयोग किया जाता है।
- 4दिशा और देवता — वास्तु में प्रत्येक दिशा का एक दिक्पाल (देवता) है। तंत्र में इन्हीं देवताओं की विशेष साधना करके वास्तु दोष शांत किया जाता है।
- 5वास्तु पुरुष मंडल — वास्तु पुरुष की अवधारणा (भवन में 45 देवताओं का मंडल) तांत्रिक मंडल विधि से मिलती-जुलती है।
- 6प्रतीक और चिह्न — स्वस्तिक, ॐ, त्रिशूल आदि चिह्नों का प्रयोग वास्तु दोष निवारण और तांत्रिक रक्षा दोनों में किया जाता है।
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