यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते श्लोक का अर्थ
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मनुस्मृति 3.56 — जहां नारियां सम्मानित होती हैं, वहां देवता निवास करते हैं। जहां सम्मान नहीं, सब कर्म निष्फल। 3.57 — जहां स्त्रियां दुःखी, वह कुल नष्ट; जहां प्रसन्न, वह कुल सदा बढ़ता है। 'पूजन' = सम्मान, अधिकार, गरिमा, प्रेम।
- 1'पूजन' = सम्मान — यहां पूजन का अर्थ मात्र धार्मिक पूजा नहीं, बल्कि व्यापक सम्मान, अधिकार, गरिमा और प्रेम है।
- 2देवता = शुभता — देवताओं का निवास = सुख, समृद्धि, शांति और मंगल।
- 3सर्वाफलाः क्रियाः — यदि घर में स्त्री का अपमान हो तो चाहे कितने भी यज्ञ, दान, पूजा करो — सब व्यर्थ। यह अत्यंत प्रभावशाली कथन है।
- 4सामाजिक संदेश — एक स्वस्थ समाज वही है जो स्त्रियों को सम्मान, शिक्षा और स्वतंत्रता देता है।
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