यंत्र की पूजा मूर्ति पूजा से कैसे भिन्न होती है?
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मूर्ति = देवता का साकार स्थूल रूप (भक्ति-प्रधान)। यंत्र = देवता का ज्यामितीय सूक्ष्म रूप (शक्ति-प्रधान)। शारदातिलक: 'मूर्ति = शरीर, यंत्र = आत्मा'। यंत्र-मंत्र-देवता = एक सत्ता के तीन रूप। यंत्र = ऊर्जा केन्द्र। दोनों मिलकर = पूर्ण उपासना। तांत्रिक साधक → यंत्र प्राथमिक।
- 1यंत्र मंत्रमय है, मंत्र की आत्मा = देवता। अर्थात यंत्र, मंत्र, और देवता — तीनों एक ही सत्ता के तीन रूप।
- 2भक्ति-प्रधान साधक → मूर्ति पूजा उचित
- 3ज्ञान/शक्ति-प्रधान साधक → यंत्र पूजा उचित
- 4तांत्रिक साधक → यंत्र पूजा प्राथमिक
- 5दोनों का संयोग → सर्वश्रेष्ठ
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तंत्र साधना
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