तीर्थ एवं मंदिरघंटाकर्ण और बद्रीनाथ धाम का संबंध — माणा गाँव के रक्षक देवताश्रीकृष्ण ने बदरिकाश्रम में घंटाकर्ण को मोक्ष दिया। आज भी माणा गाँव (बद्रीनाथ) में वे रक्षक देवता — क्षेत्रपाल — के रूप में पूजित हैं। गढ़वाल के अनेक गाँवों में उनके मंदिर हैं।#घंटाकर्ण#बद्रीनाथ#माणा गाँव
तीर्थ एवं धार्मिक स्थलचार धाम यात्रा का क्रम क्या होना चाहिए?चार धाम यात्रा का सही क्रम है — पहले यमुनोत्री, फिर गंगोत्री, उसके बाद केदारनाथ और अंत में बद्रीनाथ। यह पश्चिम से पूर्व की दिशा में होती है और इसी क्रम में यात्रा करना शास्त्रोक्त एवं पूर्ण फलदायी माना जाता है।
तीर्थ यात्राबद्रीनाथ यात्रा दौरान कौन से नियम पालन करेंतप्त कुंड स्नान→दर्शन। ऊंचाई 3,100m = धीरे चलें, पानी पीएं, हृदय/BP सावधानी। गर्म कपड़े+रेनकोट। बायोमेट्रिक पंजीकरण। मई-नवंबर कपाट।#बद्रीनाथ#नियम#यात्रा
तीर्थ यात्राबद्रीनाथ यात्रा के नियममई-नवंबर। ऑनलाइन पंजीकरण। ~3,133m ऊंचाई। तप्त कुंड→दर्शन। ऋषिकेश→300km।#बद्रीनाथ#नियम#विष्णु
तीर्थ यात्राबद्रीनाथ मंदिर का कपाट खोलने और बंद करने का क्या नियम है?खोलना: बसंत पंचमी घोषणा → गाडू घड़ा तेल कलश ~5 दिन → रावल स्त्री वेश → प्रातः 6 कपाट। बंद: नवंबर → लक्ष्मी विराजमान → 6 मास विश्राम → अखंड ज्योति।#बद्रीनाथ#कपाट#खोलना