ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
शास्त्रीय पौराणिक मंत्र

माँ दुर्गा मंत्र

आदित्यवर्णे तपसोऽधिजातो वनस्पतिस्तव वृक्षोऽथ बिल्वः। तस्य फलानि तपसानुदन्तु मायान्तरायाश्च बाह्या अलक्ष्मीः॥

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

जप काउंटर लोड हो रहा है...

प्रकारवनस्पति (बिल्व) मंत्र
स्वरूपआदित्यवर्णा
अर्थ एवं भावार्थ

इस मंत्र का अर्थ

हे सूर्यवर्णा! आपके तप से बिल्व वृक्ष उत्पन्न हुआ। उसके फल मेरे आंतरिक और बाह्य अलक्ष्मी को दूर करें।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

आंतरिक अज्ञान व बाह्य दरिद्रता का नाश

विस्तृत लाभ

आंतरिक अज्ञान व बाह्य दरिद्रता का नाश।

जप काल

बिल्व वृक्ष के समीप स्मरण।

इसे भी पढ़ें

अन्य देवताओं के मंत्र

प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता। या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना॥ या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा पूजिता। सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥

ॐ अनेकसोमसूर्याग्निगणाकाराय नमः।

ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये महादेवः तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः

ॐ हनुमान पहलवान पहलवान, बरस बारह का जबान, हाथ में लड्‍डू मुख में पान, खेल खेल गढ़ लंका के चौगान, अंजनी‍ का पूत, राम का दूत, छिन में कीलौ नौ खंड का भू‍त, जाग जाग हड़मान हुँकाला, ताती लोहा लंकाला, शीश जटा डग डेरू उमर गाजे, वज्र की कोठड़ी ब्रज का ताला, आगे अर्जुन पीछे भीम, चोर नार चंपे ने सींण, अजरा झरे भरया भरे, ई घट पिंड की रक्षा राजा रामचंद्र जी लक्ष्मण कुँवर हड़मान करें।

ॐ प्रजृम्भाय नमः

अहमेव वात इव प्र वाम्यारभमाणा भुवनानि विश्वा। परो दिवा पर एना पृथिव्यैतावती महिना सम्बभूव॥

मंत्र | Pauranik