ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
शास्त्रीय पौराणिक मंत्र

भार्गव पराक्रम स्तुति

आत्मनः शक्तिमुद्वीक्ष्य मानोत्साहौ तु यो व्रजेत्। शत्रूनेकोऽपि हन्याच्च क्षत्रियान् भार्गवो यथा॥

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारशौर्य मंत्र
स्वरूपरण-पंडित भार्गव राम
अर्थ एवं भावार्थ

इस मंत्र का अर्थ

जो व्यक्ति अपनी शक्ति का सही आकलन करके आत्मसम्मान और उत्साह के साथ आगे बढ़ता है, वह अकेला ही अनेक शत्रुओं का नाश कर सकता है, ठीक वैसे ही जैसे भार्गव (परशुराम) ने किया था।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

असीम आत्मविश्वास और अदम्य साहस की प्राप्ति

विस्तृत लाभ

असीम आत्मविश्वास और अदम्य साहस की प्राप्ति।

जप काल

युद्ध, प्रतिस्पर्धा या कठिन जीवन-चुनौतियों का सामना करने से पूर्व।

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भार्गव पराक्रम स्तुति | Pauranik