शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
अधरौष्ठं हृषीकेशो दन्तपंक्तिं गदाग्रजः । रासेश्वरश्च रसनां तालुकं वामनो विभुः ॥
अधरौष्ठं हृषीकेशो दन्तपंक्तिं गदाग्रजः । रासेश्वरश्च रसनां तालुकं वामनो विभुः ॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारश्रीकृष्ण कवच (श्लोक-मन्त्र 3) / संरक्षण मन्त्र
स्वरूपहृषीकेश, गदाग्रज, रासेश्वर, वामन
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
हृषीकेश होठों की, गदाग्रज दांतों की, रासेश्वर जीभ की और वामन तालु की रक्षा करें 19।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
वाणी की शुद्धि, सत्य-भाषण की शक्ति और वाक्-तत्व की रक्षा
विस्तृत लाभ
वाणी की शुद्धि, सत्य-भाषण की शक्ति और वाक्-तत्व की रक्षा 19।
जप काल
कवच न्यास के अन्तर्गत।
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ सिंहिकाप्राणभञ्जनाय नमः
ॐ पुण्डरीकाक्षाय नमः
ॐ सर्वसिद्धिप्रदाय नमः
मदोन्मदातियौवने प्रमोदमानमण्डिते प्रियानुरागरञ्जिते कलाविलासपण्डिते। अनन्यधन्यकुञ्जराज्यकामकेलिकोविदे कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्षभाजनम्॥
शरजन्मा गणाधीश पूर्वजो मुक्तिमार्गकृत् । सर्वागमप्रणेता च वाञ्छितार्थप्रदर्शनः ॥
ॐ शुभप्रदायै नमः