शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
माँ दुर्गा मंत्र
ॐ अव्ययाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-मंत्र
स्वरूपअविनाशी
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जिनका कभी विनाश, ह्रास या स्वरूप-परिवर्तन नहीं होता।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
स्थिरता
विस्तृत लाभ
स्थिरता
जप काल
नित्य
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ सूक्ष्मायै नमः
ॐ वरारोहायै नमः
बुद्धिविच्छिन्नचैतन्यमेकं पूर्णमथापरम्। आभासत्वपरं बिम्बभूतमेवं त्रिधा चितिः॥
ॐ दामोदराय विद्महे रुक्मिणीवल्लभाय धीमहि तन्नो कृष्णः प्रचोदयात् ॥
ॐ ह्रां ह्रीं ॐ नमो भगवते महा-वीर-वीराय सर्वदुःख निवारणाय ग्रहमण्डल सर्वभूतमण्डल सर्व-पिशाच-मण्डलोच्चाटन भूत-ज्वर एकाहिक-ज्वर द्वयाहिक-ज्वर त्र्याहिक-ज्वर चातुर्थिक-ज्वर संताप-ज्वर विषम-ज्वर ताप-ज्वर माहेश्वर-वैष्णव-ज्वरान् छिन्दि-छिन्दि यक्ष ब्रह्मराक्षस भूत-प्रेत-पिशाचान् उच्चाटय-उच्चाटय स्वाहा।
ॐ नीललोहिताय नमः