शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
माँ दुर्गा मंत्र
ॐ भक्तरक्तपायै नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारसहस्रनाम स्तोत्र मंत्र (दशमहाविद्या)
स्वरूपदशमहाविद्या काली / करालवदना काली
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो (प्रतीकात्मक रूप से) भक्तों के 'रक्त' अर्थात् उनके अहंकार, आसक्ति और रजोगुण का पान कर उन्हें शुद्ध करती हैं 34।
जप काल
देवी की मूर्ति, यंत्र या चित्र के सम्मुख 'ककारादि सहस्रार्चन' विधि द्वारा।
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
विद्यार्थी लभते विद्यां, धनार्थी लभते धनम् । पुत्रार्थी लभते पुत्रान्, मोक्षार्थी लभते गतिम् ॥
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं ह्रीं क्लीं सर्व विघ्न निवारणाय महा क्रोध भैरवाय नमः।
षडाननं चन्दनलेपिताङ्गं महोरसं दिव्यमयूरवाहनम् । रुद्रस्य सूनुं सुरलोकनाथं ब्रह्मण्यदेवं शरणं प्रपद्ये ॥
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं रां रामाय रघुनन्दनाय जानकीवल्लभाय स्वाहा
ॐ त्रिशक्त्यै नमः
ॐ कान्तायै नमः