माँ दुर्गा मंत्र
ॐ चित्रकूटसमाश्रयाय नमः
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
जिन्होंने वनवास के आरंभिक काल में पवित्र चित्रकूट पर्वत पर आश्रय लिया था।
इस मंत्र से क्या होगा?
इन 108 मंत्रों का शृंखलाबद्ध पाठ शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक शांति प्रदान करता है
दरिद्रता व नकारात्मकता का नाश करता है
और अंततः वैकुण्ठ की प्राप्ति सुनिश्चित करता है
विस्तृत लाभ
इन 108 मंत्रों का शृंखलाबद्ध पाठ शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक शांति प्रदान करता है; दरिद्रता व नकारात्मकता का नाश करता है; और अंततः वैकुण्ठ की प्राप्ति सुनिश्चित करता है।
जप काल
नित्य प्रातः या गोधूलि वेला में, तुलसी या रुद्राक्ष की माला से अनुष्ठानिक पाठ।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ विनिद्रायै नमः
निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं। चिदाकाशमाकाशवासं भजेऽहम्॥
जाज्वल्यमानं सुरवृन्दवन्द्यं कुमारधारातटमन्दिरस्थम् । कन्दर्परूपं कमनीयगात्रं ब्रह्मण्यदेवं शरणं प्रपद्ये ॥
ॐ अरविन्दपदद्वन्द्वायै नमः
ॐ हस्तिपिशाचिलिखे स्वाहा ॥
ॐ ह्रीं बटुकाय मम ग्रह बाधा निवारणं कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं ॐ स्वाहा।