शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
नैऋत्य रक्षा
ॐ ह्रीं श्रीं त्र्यक्षरो मन्त्रो नैर्ऋत्यां मे सदाऽवतु। (अर्थ: त्र्यक्षरी मन्त्र नैऋत्य कोण में रक्षा करे) 8
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः॥ 16
ॐ ह्रीं ह्रीं साफल्यायै सिद्धये ॐ नमः
ॐ श्रीमती नेत्रयुगलं पातु।
ॐ कथंकारपदार्थभुवे नमः
सर्वं जगदिदं त्वत्तो जायते ॥ सर्वं जगदिदं त्वत्तस्तिष्ठति ॥ सर्वं जगदिदं त्वयि लयमेष्यति ॥ सर्वं जगदिदं त्वयि प्रत्येति ॥ त्वं भूमिरापोऽनलोऽनिलो नभः ॥ त्वं चत्वारि वाक्पदानि ॥
ॐ स्मितभाषिणे नमः