ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
शास्त्रीय पौराणिक मंत्र

प्रह्लादकृत आत्म-समर्पण मंत्र

इतो नृसिंहः परतो नृसिंहो यतो यतो यामि ततो नृसिंहः। बहिर्नृसिंहो हृदये नृसिंहो नृसिंहमादिं शरणं प्रपद्ये॥

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारप्रपत्ति मंत्र
स्वरूपसर्वव्यापी / आदि नरसिंह
अर्थ एवं भावार्थ

इस मंत्र का अर्थ

इधर भी नरसिंह हैं, उधर भी नरसिंह हैं। जहाँ-जहाँ मैं जाता हूँ, वहाँ नरसिंह हैं। बाहर नरसिंह हैं, हृदय में भी नरसिंह हैं। उन आदि देव नरसिंह की मैं शरण लेता हूँ।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

अकाल मृत्यु, भय और घोर ऋण-बाधा का निवारण

02

पूर्ण शरणागति की सिद्धि

विस्तृत लाभ

अकाल मृत्यु, भय और घोर ऋण-बाधा का निवारण। पूर्ण शरणागति की सिद्धि।

जप काल

संकट के समय, यात्रा आरंभ करते समय या नित्य शयन से पूर्व मानसिक जप।

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अन्य देवताओं के मंत्र

प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र

मनोजवम् मारुततुल्यवेगम् जितेन्द्रियम् बुद्धिमताम् वरिष्ठम्। वातात्मजम् वानरयूथमुख्यम् श्रीरामदूतम् शरणम् प्रपद्ये॥

ॐ भ्रां भ्रां भ्रां भैरवाय नमः।

ऐमित्येकाक्षरो मन्त्रो मम कण्ठं सदाऽवतु। (स्वरूप: एकाक्षरी बीज | लाभ: कंठ, स्वर-तंत्र और विशुद्धि चक्र की रक्षा, संगीतकारों के लिए अति उत्तम | अर्थ: 'ऐं' रूपी एकाक्षर मन्त्र मेरे कंठ की सदा रक्षा करे) 8

ॐ कुमारीपूजनप्रीतायै नमः

ॐ विश्वरेतसे नमः

हस्तीन्द्राननमिन्दुचूडमरुणच्छायं त्रिनेत्रं रसात् आलिष्टं प्रियया सपद्मकरया स्वाङ्कस्थया सन्ततम् । बीजपूर गदेक्षु कार्मुकलसच्चक्राब्ज पाशोत्पल व्रीह्यग्रस्वविषाण रत्नकलशान् हस्तैर्वहन्तं भजे ॥