माँ दुर्गा मंत्र
जलेषु मां रक्षतु मत्स्यमूर्तिर् यादोगणेभ्यो वरुणस्य पाशात्
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
भगवान का मत्स्य अवतार जल-जंतुओं और वरुण के पाश से जल के भीतर मेरी रक्षा करे।
इस मंत्र से क्या होगा?
जल-मार्ग में यात्रा करते समय जल-जंतुओं और डूबने के भय से पूर्ण रक्षा
विस्तृत लाभ
जल-मार्ग में यात्रा करते समय जल-जंतुओं और डूबने के भय से पूर्ण रक्षा 61।
जप काल
जल यात्रा से पूर्व या संकट के समय।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ महोत्कटायै नमः
यः शुचिः प्रयतो भूत्वा जुहुयादाज्यमन्वहम्। सूक्तं पञ्चदशर्चं च श्रीकामः सततं जपेत्॥
ॐ परमेष्ठिने नमः
श्री राधे शरणं मम
निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं। चिदाकाशमाकाशवासं भजेऽहम्॥
ख्फ्रेँ ख्फ्रीँ चण्डे चण्डचामुण्डे ह्रीँ हूँ स्त्रीँ छ्रीँ विच्चे घोरे महामदोन्मनि क्लीँ ब्लूँ गुह्येश्वरि ॐ परानिर्वाणे ब्रह्मरूपिणि ॐ फ्रेँ फ्रेँ सिद्धिकरालि आप्यायिनि नवपञ्चचक्रनिलये घोराट्टराविणि कलासहस्रनिवासिनि खँ खँ खँ ह्सौँ फ्रेँ अवर्णेश्वरि प्रकृत्यपर शिवनिर्वाणदे ख्फ्रेँ स्वाहा॥