शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
कामदेवाय सर्वजनप्रियाय सर्वजनसम्मोहनाय ज्वल ज्वल प्रज्वल प्रज्वल सर्वजनस्य हृदयं मे वशं कुरु कुरु स्वाहा ॥
कामदेवाय सर्वजनप्रियाय सर्वजनसम्मोहनाय ज्वल ज्वल प्रज्वल प्रज्वल सर्वजनस्य हृदयं मे वशं कुरु कुरु स्वाहा ॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारअनंग गायत्री (गोपाल-तापनी) / तान्त्रिक वेदी मन्त्र / सम्मोहन मन्त्र
स्वरूपकामदेव स्वरूप श्रीकृष्ण (चिन्मय मदन-मोहन)
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो आध्यात्मिक कामदेव हैं, सर्वजन-प्रिय हैं और सबको सम्मोहित करने वाले हैं, उनका तेज प्रज्वलित हो। वे सभी जनों के हृदय को मेरे (भगवद्-भक्ति के) अनुकूल (वश में) करें 1।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
सर्वाकर्षण, विश्व-प्रेम की जाग्रति और भगवान की भक्ति में सम्मोहन
02
यह भौतिक नहीं अपितु आध्यात्मिक आकर्षण का मन्त्र है
विस्तृत लाभ
सर्वाकर्षण, विश्व-प्रेम की जाग्रति और भगवान की भक्ति में सम्मोहन। यह भौतिक नहीं अपितु आध्यात्मिक आकर्षण का मन्त्र है 1।
जप काल
इसे स्वर्ण कमल यंत्र (जिसमें दो त्रिकोण और अष्टदल हों) पर भगवान का ध्यान करते हुए आगमिक विधि से जपा जाता है 1।
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