माँ दुर्गा मंत्र
ॐ कराल्यै नमः
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
अत्यंत भयंकर और विकराल स्वरूप वाली देवी।
इस मंत्र से क्या होगा?
शत्रुओं और नकारात्मक शक्तियों का शमन
विस्तृत लाभ
शत्रुओं और नकारात्मक शक्तियों का शमन।
जप काल
नित्य उपासना, शिवरात्रि या अमावस्या की मध्यरात्रि में रुद्राक्ष या मुण्ड माला से जप।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ हरये नमः
ह्रीं विद्याधिष्ठातृदेव्यै स्वाहा ओष्ठं सदाऽवतु। (स्वरूप: विद्याधिष्ठात्री | लाभ: होठों और उच्चारण स्थान की रक्षा | अर्थ: विद्या की अधिष्ठात्री देवी मेरे होंठों की सदा रक्षा करें) 8
ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं ऐं सौं ॐ ह्रीं क ए ई ल ह्रीं ह स क ह ल ह्रीं सकल ह्रीं सौं ऐं क्लीं ह्रीं श्रीं ॐ।
ॐ जृम्भणाय नमः।
सहस्राणि सहस्रशो ये रुद्रा अधि भूम्याम्। तेषां सहस्रयोजनेऽवधन्वानि तन्मसि॥
गजेन्द्रवदनं साक्षाच्चलकर्ण सुचामरम् । हेमवर्णं चतुर्बाहुं पाशाङ्कुशधरं वरम् ॥ स्वदन्तं दक्षिणे हस्ते सव्ये त्वाम्रफलं तथा । पुष्करे मोदकं चैव धारयन्तमनुस्मरेत् ॥