करारविन्देन पदारविन्दं मुखारविन्दे विनिवेशयन्तम् । वटस्य पत्रस्य पुटे शयानं बालं मुकुन्दं मनसा स्मरामि ॥
करारविन्देन पदारविन्दं मुखारविन्दे विनिवेशयन्तम् । वटस्य पत्रस्य पुटे शयानं बालं मुकुन्दं मनसा स्मरामि ॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
इस मंत्र का अर्थ
जो अपने कर-कमलों (हाथों) से चरण-कमलों को पकड़कर अपने मुख-कमल में डाल रहे हैं, और प्रलय-काल में वट-वृक्ष के पत्ते पर शयन कर रहे हैं, उन बाल-मुकुन्द का मैं मन से स्मरण करता हूँ 35।
इस मंत्र से क्या होगा?
वात्सल्य भाव की जाग्रति, चित्त की अगाध शान्ति और जीवन के बड़े से बड़े भयों से मुक्ति
विस्तृत लाभ
वात्सल्य भाव की जाग्रति, चित्त की अगाध शान्ति और जीवन के बड़े से बड़े भयों से मुक्ति 35।
जप काल
शयन से पूर्व या बाल-कृष्ण (लड्डू गोपाल) की पूजा के समय 20।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये भगवान्विष्णुः तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
ॐ विश्वाकाराय नमः
ॐ बलिभुन्नाथाय नमः।
ॐ पद्मोद्भवायै नमः
ॐ वकारमकरारूढाय नमः
ॐ सर्ववर्णात्मिकायै पादयुग्मं सदाऽवतु। (स्वरूप: सर्ववर्णात्मिका | लाभ: दोनों पैरों की रक्षा | अर्थ: समस्त अक्षर-स्वरूपा देवी मेरे पैरों की रक्षा करें) 8