शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
माँ दुर्गा मंत्र
ॐ महादेवसंस्तुत्यायै नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपमहादेवसंस्तुत्या
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
शिव-तत्व और ज्ञान-तत्व का समन्वय
विस्तृत लाभ
शिव-तत्व और ज्ञान-तत्व का समन्वय
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ॐ महाकाल्यै नमः
खों खं खं फट् प्राण-ग्रासी प्राण-ग्रासी हुं फट् सर्वशत्रुसंहारणां शरभशालुवाय पक्षिराजाय हुं फट् स्वाहा।
जाज्वल्यमानं सुरवृन्दवन्द्यं कुमारधारातटमन्दिरस्थम् । कन्दर्परूपं कमनीयगात्रं ब्रह्मण्यदेवं शरणं प्रपद्ये ॥
तप्तकाञ्चन संकाशश्चाष्टहस्तो महातनुः । दीप्ताङ्कुशं शरं चाक्षं दन्तं दक्षे वहन् करैः ॥ वामे पाशं कार्मुकं च लतां जम्बू दधत् करैः । रक्तांशुकः सदा भूयाद् दुर्गागणपतिर्मुदे ॥
ॐ जामदग्न्यमहादर्पदलनाय नमः
वागीशा यस्य वदने लक्ष्मीर्यस्य च वक्षसि। यस्यास्ते हृदये संवित् तं नृसिंहमहं भजे॥