शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
नारायण कृत रासेश्वरी स्तुति मंत्र
नमस्ते परमेशानि रासमण्डलवासिनी। रासेश्वरि नमस्तेऽस्तु कृष्ण प्राणाधिकप्रिये॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारस्तोत्र-मंत्र / वंदना
स्वरूपरासेश्वरी / राधारानी
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
रासमण्डल में निवास करने वाली परमेश्वरी, कृष्ण को प्राणों से भी अधिक प्रिय हे रासेश्वरी! आपको मेरा नमस्कार है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
भगवान् विष्णु/नारायण के समान ही राधा की सर्वोच्च कृपा प्राप्त होना, रास-रस का स्फुरण
विस्तृत लाभ
भगवान् विष्णु/नारायण के समान ही राधा की सर्वोच्च कृपा प्राप्त होना, रास-रस का स्फुरण 11।
जप काल
रास पूर्णिमा, शरद पूर्णिमा या राधाष्टमी को वंदना के रूप में।
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