श्री विष्णु गायत्री मंत्र
ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
हम भगवान नारायण को जानते हैं, वासुदेव का ध्यान करते हैं; वे भगवान विष्णु हमारी बुद्धि को प्रकाशित करें।
इस मंत्र से क्या होगा?
स्पष्ट सोच, अज्ञान का नाश, और परम शांति की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
स्पष्ट सोच, अज्ञान का नाश, और परम शांति की प्राप्ति 25।
जप काल
प्रातः संधिकाल में सूर्य की ओर मुख करके।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ बलिने नमः
सिन्दूराभमिभाननं त्रिनयनं च पाशाङ्कुशौ बिभ्राणं मधुमत्कपालमनिशं साद्विन्दुमौलिं भजे । पुष्ट्या श्लिष्टतनुं ध्वजाग्रकरया पद्मोल्लसद्धस्तया तद्योन्याहितपाणिमात्तवसुमत पात्रोल्लसत्पुष्करम् ॥
ॐ मनोन्मन्यै नमः
मार्गणाशोषिताभ्ध्यंशं पावनं चिरजीवनम्। य एतानि जपेन्द्रामनामानि स कृती भवेत्॥
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये महादेवतः तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
ॐ ज्वलन्मुखाय नमः