शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्री दुर्गा कवचम (अंग रक्षा मंत्र - 2)
पञ्चमं स्कन्दमातेति षष्ठं कात्यायनीति च। सप्तमं कालरात्रीति महागौरीति चाष्टमम्॥ नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गाः प्रकीर्तिताः।
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारकवच मंत्र
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
ग्रहों के कुप्रभाव, तंत्र-मंत्र और मारण-प्रयोगों से बचाव
विस्तृत लाभ
ग्रहों के कुप्रभाव, तंत्र-मंत्र और मारण-प्रयोगों से बचाव 54।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ कल्याण्यै नमः
ॐ एकवर्णाय नमः
मयि मेधां मयि प्रजां मय्यग्निस्तेजो दधातु। मयि मेधां मयि प्रजां मयीन्द्र इन्द्रियं दधातु। मयि मेधां मयि प्रजां मयि सूर्यो भ्राजो दधातु॥
ॐ नमो बटुक भैरवाय कामदेवाय यस्य यस्य दृश्यो भवामि यश्च यश्च मम सुखं तं तं मोहयतु स्वाहा।
ॐ कामरूपकृतावासायै नमः
ॐ ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः।