राधे कृष्ण राधे कृष्ण कृष्ण कृष्ण राधे राधे । राधे श्याम राधे श्याम श्याम श्याम राधे राधे ॥
राधे कृष्ण राधे कृष्ण कृष्ण कृष्ण राधे राधे । राधे श्याम राधे श्याम श्याम श्याम राधे राधे ॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
श्री राधा और श्री कृष्ण (श्याम) के दिव्य युगल नामों का निरन्तर आवाहन और महिमा-गान।
इस मंत्र से क्या होगा?
युगल-भक्ति (सखी भाव) की प्राप्ति, मानसिक शान्ति, और वृन्दावन-रस का गहरा अनुभव
विस्तृत लाभ
युगल-भक्ति (सखी भाव) की प्राप्ति, मानसिक शान्ति, और वृन्दावन-रस का गहरा अनुभव 18।
जप काल
संकीर्तन के रूप में उच्च स्वर में या तुलसी माला पर नित्य जप।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
जो अत्यंत तेजस्वी और महाप्रतापी हैं, उन्हें नमस्कार। (लाभ: व्यक्तित्व में तेज और ओज की वृद्धि) 19।
सिन्दूराभमिभाननं त्रिनयनं च पाशाङ्कुशौ बिभ्राणं मधुमत्कपालमनिशं साद्विन्दुमौलिं भजे । पुष्ट्या श्लिष्टतनुं ध्वजाग्रकरया पद्मोल्लसद्धस्तया तद्योन्याहितपाणिमात्तवसुमत पात्रोल्लसत्पुष्करम् ॥
ॐ कालाय नमः।
ॐ वश्याद्यष्टक्रियाप्रदाय नमः
क्लीं कृष्णाय राधिकायै श्रेयं नमः
ॐ भक्तवत्सलाय नमः