विपत्ति नाशक शक्तिशाली मंत्र
रक्षांसि यत्रोग्रविषाश्च नागा यत्रारयो दस्युबलानि यत्र। दावानलो यत्र तथाब्धिमध्ये तत्र स्थिता त्वं परिपासि विश्वम्॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
इस मंत्र से क्या होगा?
चोर-डाकुओं, हिंसक पशुओं, अग्नि और जल के बीच फंसे होने पर रक्षा
विस्तृत लाभ
चोर-डाकुओं, हिंसक पशुओं, अग्नि और जल के बीच फंसे होने पर रक्षा।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ कदम्बवनसञ्चारायै नमः
रक्तो रक्ताङ्गरागां शुक कुसुमायुत तुन्दिलश्चन्द्रमौलिः नेत्रैर्युक्तस्त्रिभिर्वामनकरचरणो बीजपूरं दधानः । हस्ताग्रक्लृप्त पाशाङ्कुश शरवरदो नागवक्त्रो हि भूषो देवः पद्मासनस्थो भवतु सुखकरो भूतये विघ्नराजः ॥
अशेषहावभावधीरहीरहारभूषिते प्रभूतशातकुम्भकुम्भकुम्भकुम्भसुस्तनि। प्रशस्तमन्दहास्यचूर्णपूर्णसौख्यसागरे कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्षभाजनम्॥
ॐ ह्रीं श्रीं वीर लक्ष्म्यै नमः।
ॐ विष्णवे नमः (नारायण कवच हृदयादि न्यास)
ॐ जङ्घे पातु धराभारहर्ता योऽसौ नृकेसरी