शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
माँ दुर्गा मंत्र
ॐ सर्वमन्त्रस्वरूपवते नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपमंत्र-स्वरूप
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो स्वयं समस्त वेदोक्त और तांत्रिक मंत्रों के स्वरूप हैं, उन्हें नमन।
जप काल
नित्य प्रातः काल, लाल आसन पर बैठकर रुद्राक्ष या लाल चंदन की माला से 108 नामों का क्रमशः उच्चारण करते हुए पुष्प अर्पित करें।
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
त्वं गुणत्रयातीतः ॥ त्वं देहत्रयातीतः ॥ त्वं कालत्रयातीतः ॥ त्वं मूलाधारस्थितोऽसि नित्यम् ॥ त्वं शक्तित्रयात्मकः ॥ त्वां योगिनो ध्यायन्ति नित्यम् ॥
श्री राम लक्ष्मण जानकी, जय बोलो हनुमान की
ॐ क्रीडामनुजबालकाय नमः
ॐ अहं रुद्रेभिर्वसुभिश्चराम्यहमादित्यैरुत विश्वदेवैः। अहं मित्रावरुणोभा बिभर्म्यहमिन्द्राग्नी अहमश्विनोभा॥
ॐ सुरराज्यप्रदः पातु पादौ मे नृहरीश्वरः
ॐ श्रीं बं सौघ बलवर्धनाय बालेश्वराय रुद्राय फट् ॐ