माँ दुर्गा मंत्र
शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
जिनका स्वरूप शांत है, जो शेषनाग पर शयन करते हैं, जिनकी नाभि में कमल है, और जो देवताओं के स्वामी हैं, उन भगवान विष्णु को मैं प्रणाम करता हूँ।
इस मंत्र से क्या होगा?
मन की असीम शांति, सांसारिक भय (भव-भय) से मुक्ति और एकाग्रता
विस्तृत लाभ
मन की असीम शांति, सांसारिक भय (भव-भय) से मुक्ति और एकाग्रता 10।
जप काल
पूजा के आरंभ में भगवान के स्वरूप का मानसिक ध्यान करते हुए।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ परमात्मिकायै नमः
वागीशा यस्य वदने लक्ष्मीर्यस्य च वक्षसि। यस्यास्ते हृदये संवित् तं नृसिंहमहं भजे॥
ॐ सुरासुरनमस्कृतायै नमः
ॐ नवव्याकृतपण्डिताय नमः
ॐ कराल-वदनां घोरां मुक्त-केशीं चतुर्भुजाम्। कालिकां दक्षिणां दिव्यां मुण्ड-माला विभूषिताम्। सद्यः-छिन्न-शिरः-खड्ग-वामाधोर्ध्व-कराम्बुजाम्। अभयं वरदञ्चैव दक्षिणोर्ध्वाधः-पाणिकाम्॥
ॐ गुहाय नमः