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शास्त्रीय पौराणिक मंत्र

कालभैरवाष्टकम् - मंत्र 3

शूलटङ्कपाशदण्डपाणिमादिकारणं श्यामकायमादिदेवमक्षरं निरामयम्।

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारस्तोत्र-मंत्र
स्वरूपकाल भैरव
अर्थ एवं भावार्थ

इस मंत्र का अर्थ

हाथों में त्रिशूल, पाश और दंड धारण करने वाले निरोगी आदिदेव की वंदना करता हूँ।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

रोगों से मुक्ति (निरामयम्) और अस्त्र-शस्त्रों के भय का नाश

विस्तृत लाभ

रोगों से मुक्ति (निरामयम्) और अस्त्र-शस्त्रों के भय का नाश।

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