शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
चामुण्डा संरक्षण मंत्र
ॐ श्रीं ह्रीं चामुण्डायै नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारसंरक्षण मंत्र
स्वरूपचामुण्डा
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
श्रीं (समृद्धि) और ह्रीं (रक्षा) के बीज के साथ देवी चामुण्डा को मेरा नमन।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
शारीरिक और मानसिक सुरक्षा
विस्तृत लाभ
शारीरिक और मानसिक सुरक्षा।
जप काल
प्रातःकाल दैनिक वंदना।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ वाचं वाणी सदा पातु।
थुतिप्पोरक्कु वल्विणैपोम् तुन्बम्पोम् नेञ्जिल् पतिप्पोरक्कु सेल्वम् पलिथ्थुक्
ॐ भगनेत्रभिदे नमः
या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता। या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना॥ या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा पूजिता। सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥
ॐ विदुराक्रूरवरदाय नमः
ॐ सहस्राक्षाय नमः