शृतं मे मा प्रहासीः
ॐ शृतं मे मा प्रहासीः अनेनाधीतेनाहोरात्रान्सन्दधामि ऋतं वदिष्यामि सत्यं वदिष्यामि। तन्मामवतु तद्वक्तारमवतु अवतु मामवतु वक्तारमवतु वक्तारम्। ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
मैंने जो सुना (पढ़ा) है, वह मेरा त्याग न करे (मुझे याद रहे)। इस अध्ययन से मैं दिन-रात को एक कर दूँ। मैं ऋत (शाश्वत सत्य) बोलूंगा, सत्य बोलूंगा। वह ब्रह्म मेरी रक्षा करे, वह वक्ता (गुरु) की रक्षा करे।
इस मंत्र से क्या होगा?
अध्ययन किए गए ज्ञान का विस्मरण न होना (याददाश्त पक्की होना), सत्यभाषण की अमोघ शक्ति
विस्तृत लाभ
अध्ययन किए गए ज्ञान का विस्मरण न होना (याददाश्त पक्की होना), सत्यभाषण की अमोघ शक्ति।
जप काल
वेदाध्ययन या किसी भी गंभीर पुस्तक के पठन से पूर्व।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
पाँचों त्रिशेम चलें, लांगुरिया सलार चलें। भीम की गदा चले, हनुमान की हाँक चले। नाहर की धाक चलै, नहीं चलै, तो हजरत सुलेमान के तखत की दुहाई है। एक लाख अस्सी हजार पीर व पैगम्बरों की दुहाई है। चलो मन्त्र, ईश्वर वाचा। गुरु का शब्द साँचा।
ॐ सत्यसन्धाय नमः
ॐ नमस्ते गणपतये ॥ त्वमेव प्रत्यक्षं तत्त्वमसि ॥ त्वमेव केवलं कर्ताऽसि ॥ त्वमेव केवलं धर्ताऽसि ॥ त्वमेव केवलं हर्ताऽसि ॥ त्वमेव सर्वं खल्विदं ब्रह्मासि ॥ त्वं साक्षादात्माऽसि नित्यम् ॥
ॐ इन्दुशीतलायै नमः
स्फुरन्मौलि कल्लोलिनी चारु गङ्गा। लसद्भालबालेन्दु कण्ठे भुजङ्गा॥
ॐ वृन्दारध्यायै नमः