शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
माँ दुर्गा मंत्र
सूक्ष्मातिसूक्ष्मं कलिलस्य मध्ये विश्वस्य स्रष्टारमनेकरूपम्
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो सूक्ष्म से भी सूक्ष्म है और अनेक रूपों में विश्व का स्रष्टा है, उसे जानकर शांति मिलती है
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
अनेकमन्त्रनादमञ्जुनूपुरारवस्खलत्समाजराजहंसवंशणिक्वाणातिगौरवे। विलोलहेमवल्लरीविडम्बिवारुचङ्क्रमे कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्षभाजनम्॥
ॐ आहूताय नमः
ॐ किशोर्यै नमः
ॐ विश्ववन्द्यायै नमः
ॐ श्रीं कृष्णाय श्रीं श्रीं श्रीं गोविन्दाय गोपालय गोलोक सुंदराय...
अधो स्वर्णाकर्षण भैरवाय नमः अधो मां रक्ष रक्ष काल कंटकान् भक्ष भक्ष आवाहयाम्यहं इत्र तिष्ठ तिष्ठ हुं फट् स्वाहा।