माँ दुर्गा मंत्र
स्तुवन्ति ये स्तुतिभिरमीभिरन्वहं त्रयीमयीं त्रिभुवनमातरं रमाम्। गुणाधिका गुरुतरभाग्यभागिनो भवन्ति ते भुवि बुधभाविताशयाः॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
जो प्रतिदिन वेद-स्वरूपा, त्रिभुवन-माता रमा की इन स्तुतियों से वंदना करते हैं, वे पृथ्वी पर महान भाग्यशाली और गुणी बन जाते हैं।
इस मंत्र से क्या होगा?
प्रचुर भाग्य और विद्वानों के बीच सम्मान की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
प्रचुर भाग्य और विद्वानों के बीच सम्मान की प्राप्ति।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ चिरञ्जीविने नमः
ॐ अवनीधारिण्यै देव्यै नमः
अस्य घा वीर ईवतोऽग्नेरीशीत मर्त्यः । तिग्मजम्भस्य मीळ्हुषः ॥
व्यक्ताव्यक्तगिरः सर्वे वेदाद्या व्याहरन्ति याम्। सर्वकामदुघा धेनुः सा मां पातु सरस्वती॥ सौः देवीं वाचमजनयन्त देवास्ता विश्वरूपाः पशवो वदन्ति। सा नो मन्द्रेषमूर्जं दुहाना धेनुर्वागस्मानुपसुष्टुतैतु॥
ॐ करतयायै नमः
ॐ वामनरूपाय नमः