शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
माँ दुर्गा मंत्र
ॐ सुकीर्तये नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-मंत्र
स्वरूपश्रेष्ठ कीर्ति
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जिनकी यश और कीर्ति तीनों लोकों में सिद्धों द्वारा गाई जाती है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
यश
विस्तृत लाभ
यश
जप काल
नित्य
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
देवि प्रपन्नार्तिहरे प्रसीद प्रसीद मातर्जगतोऽखिलस्य। प्रसीद विश्वेश्वरि पाहि विश्वं त्वमीश्वरी देवि चराचरस्य॥ 18
न मृत्युर्न शंका न मे जातिभेदः... चिदानन्दरूपः शिवोऽहम् शिवोऽहम्॥
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महामीनाय धीमहि तन्नो मत्स्यः प्रचोदयात्।
नीलाब्ज दाडिमी वीणा शालि गुञ्जाक्ष सूत्रकम् । दधदुच्छिष्ट नामायं गणेशः पातु मोक्षदः ॥
ॐ ह्रीं जिह्वाग्रवासिन्यै स्वाहाऽग्निदिशि रक्षतु। (अर्थ: जिह्वाग्र में बसने वाली देवी आग्नेय कोण में रक्षा करें) 8
ॐ महालक्ष्म्यै नमः