शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
कार्तिकेय अंगन्यास/कवच मंत्र
ॐ स्वाँ हृदयाय नमः, ॐ ह्रीँ शिरसे स्वाहा, ॐ क्लीँ शिखायै वषट्, ॐ ऐँ कवचाय हुं
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपनागेश्वर / कार्तिकेय
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
स्वाँ हृदय की, ह्रीं सिर की, क्लीं शिखा की और ऐं कवच के रूप में सम्पूर्ण देह की रक्षा करे।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
ऊर्जा संरक्षण, अस्त्र-शस्त्र व शत्रुओं से रक्षा
विस्तृत लाभ
ऊर्जा संरक्षण, अस्त्र-शस्त्र व शत्रुओं से रक्षा।
जप काल
मुख्य मंत्र-जप से पूर्व अंग-न्यास हेतु।
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ॐ वामनाय नमः
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ॐ चण्डविक्रमाय नमः
व्लूं (Vlūm)