शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
माँ दुर्गा मंत्र
ॐ स्वरूपाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-मंत्र
स्वरूपनिज-स्वरूप
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो सदा अपने वास्तविक दिव्य स्वरूप (आत्मभाव) में स्थित रहते हैं।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
आत्मबोध
विस्तृत लाभ
आत्मबोध
जप काल
ध्यान
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
देवराजसेव्यमानपावनाङ्घ्रिपङ्कजं व्यालयज्ञसूत्रमिन्दुशेखरं कृपाकरम्।
स्वस्ति श्रीगणनायको गजमुखो मोरेश्वरः सिद्धिदः बल्लाळस्तु विनायकस्तथा मढे चिन्तामणिस्थेवर । लेण्याद्रौ गिरिजात्मजः सुवरदो विघ्नेश्वरश्चोझरे ग्रामे रांजणसंस्थितो गणपतिः कुर्यात् सदा मङ्गलम् ॥
ॐ सुब्रह्मण्याय नमः
ॐ पार्वत्यै नमः
को नहिं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो॥
अनन्तकोटिविष्णुलोकनम्रपद्मजार्चिते हिमाद्रिजापुलोमजाविरिञ्चिजावरप्रदे। अपारसिद्धिरिद्धिदिग्दिगन्तकीर्तिदिगधमे कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्षभाजनम्॥