अष्टविनायक मंगल श्लोक
स्वस्ति श्रीगणनायको गजमुखो मोरेश्वरः सिद्धिदः बल्लाळस्तु विनायकस्तथा मढे चिन्तामणिस्थेवर । लेण्याद्रौ गिरिजात्मजः सुवरदो विघ्नेश्वरश्चोझरे ग्रामे रांजणसंस्थितो गणपतिः कुर्यात् सदा मङ्गलम् ॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
मोरगांव के मोरेश्वर, पाली के बल्लालेश्वर, महड के वरदविनायक, थेउर के चिंतामणि, लेण्याद्रि के गिरिजात्मज, ओझर के विघ्नेश्वर, और रांजणगांव के महागणपति—मेरा सदैव मंगल करें।
इस मंत्र से क्या होगा?
अष्टविनायक यात्रा का पूर्ण पुण्य और जीवन में सर्व-मंगल
विस्तृत लाभ
अष्टविनायक यात्रा का पूर्ण पुण्य और जीवन में सर्व-मंगल।
जप काल
नित्य प्रातःकाल या घर से लंबी यात्रा आरंभ करते समय।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ब्रह्मस्वरूपा परमा ज्योतिरूपा सनातनी। सर्वविद्याधिदेवी या तस्यै वाण्यै नमो नमः॥
नमः शम्भवाय च मयोभवाय च नमः शङ्कराय च मयस्कराय च नमः शिवाय च शिवतराय च।
ॐ सौम्याय नमः
ॐ कीलिकायै नमः
आग्नेये रूरु भैरवाय नमः आग्नेये मां रक्ष रक्ष काल कंटकान् भक्ष भक्ष आवाहयाम्यहं इत्र तिष्ठ तिष्ठ हुं फट् स्वाहा।
अनन्तकोटिविष्णुलोकनम्रपद्मजार्चिते हिमाद्रिजापुलोमजाविरिञ्चिजावरप्रदे। अपारसिद्धिरिद्धिदिग्दिगन्तकीर्तिदिगधमे कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्षभाजनम्॥