ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
शास्त्रीय पौराणिक मंत्र

माँ दुर्गा मंत्र

तडित्सुवर्णचम्पकप्रदीप्तगौरविग्रहे मुखप्रभापरास्तकोटिशारदेन्दुमण्डले। विचित्रचित्रसञ्चरच्चकोरशावलोचने कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्षभाजनम्॥

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारकृपा-कटाक्ष/स्तोत्र मंत्र।
स्वरूपप्रदीप्त-गौर-विग्रहे (स्वर्णवर्णी)
अर्थ एवं भावार्थ

इस मंत्र का अर्थ

बिजली, स्वर्ण और चंपक के समान प्रदीप्त गौर वर्ण वाली, करोड़ों शरत्कालीन चंद्रमाओं को लजाने वाले मुख वाली राधे, कृपा करें।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

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लाभ: सौंदर्य और आकर्षण की प्राप्ति

विस्तृत लाभ

लाभ: सौंदर्य और आकर्षण की प्राप्ति।

टिप्पणी

यहाँ इस सिद्ध स्तोत्र के सभी 19 श्लोकों को मंत्र रूप में, उनके अर्थ और लाभ सहित प्रस्तुत किया गया है। सभी का

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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र

ॐ हनुमान पहलवान पहलवान, बरस बारह का जबान, हाथ में लड्‍डू मुख में पान, खेल खेल गढ़ लंका के चौगान, अंजनी‍ का पूत, राम का दूत, छिन में कीलौ नौ खंड का भू‍त, जाग जाग हड़मान हुँकाला, ताती लोहा लंकाला, शीश जटा डग डेरू उमर गाजे, वज्र की कोठड़ी ब्रज का ताला, आगे अर्जुन पीछे भीम, चोर नार चंपे ने सींण, अजरा झरे भरया भरे, ई घट पिंड की रक्षा राजा रामचंद्र जी लक्ष्मण कुँवर हड़मान करें।

ॐ विश्वघोराय नमः।

ब्रह्मासि रुद्रस्त्वमिन्द्रस्त्वमग्निस्त्वं वायुस्त्वं सूर्यस्त्वं चन्द्रमास्त्वं ब्रह्मभूर्भुवःस्वरोम्॥

ॐ श्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै महालक्ष्म्यै एह्येहि सर्वसौभाग्यं देहि मे स्वाहा।

दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू। देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥

राम कथा सुंदर कर तारी। संसय बिहग उड़ावनिहारी॥