माँ दुर्गा मंत्र
तडित्सुवर्णचम्पकप्रदीप्तगौरविग्रहे मुखप्रभापरास्तकोटिशारदेन्दुमण्डले। विचित्रचित्रसञ्चरच्चकोरशावलोचने कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्षभाजनम्॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
बिजली, स्वर्ण और चंपक के समान प्रदीप्त गौर वर्ण वाली, करोड़ों शरत्कालीन चंद्रमाओं को लजाने वाले मुख वाली राधे, कृपा करें।
इस मंत्र से क्या होगा?
लाभ: सौंदर्य और आकर्षण की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
लाभ: सौंदर्य और आकर्षण की प्राप्ति।
टिप्पणी
यहाँ इस सिद्ध स्तोत्र के सभी 19 श्लोकों को मंत्र रूप में, उनके अर्थ और लाभ सहित प्रस्तुत किया गया है। सभी का
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
मुदाकरात्तमोदकं सदा विमुक्तिसाधकं कलाधरावतंसकं विलासिलोकरक्षकम् । अनायकैकनायकं विनाशितेभदैत्यकं नताशुभाशुनाशकं नमामि तं विनायकम् ॥
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये विशुद्धात्मा तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
ॐ कृतिने नमः
ॐ वल्लीकल्याणसुन्दराय नमः
ॐ दुर्गमज्ञानदायै नमः
सुगं च मे शयनं च मे सूषा च मे सुदिनं च मे...