कैवल्य उमा-सहाय मंत्र
उमासहायं परमेश्वरं प्रभुं त्रिलोचनं नीलकण्ठं प्रशान्तम्। ध्यात्वा मुनिर्गच्छति भूतयोनिं समस्तसाक्षिं तमसः परस्तात्॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
उमा के साथ विराजमान, परमेश्वर, त्रिनेत्र, नीलकंठ और अत्यंत शांत स्वरूप शिव का ध्यान करके मुनिगण अज्ञान के अंधकार से परे उस समस्त सृष्टि के साक्षिरूप भगवान को प्राप्त करते हैं 5।
इस मंत्र से क्या होगा?
अज्ञान के अंधकार (तमस) से पार जाना और परम सत्य (कैवल्य) की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
अज्ञान के अंधकार (तमस) से पार जाना और परम सत्य (कैवल्य) की प्राप्ति 5।
जप काल
ध्यान-मुद्रा में।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ श्रीं कृष्णाय श्रीं । श्रीं श्रीं गोविन्दाय गोपालाय गोलोक सुन्दराय सत्याय नित्याय परमात्मने पराय वैखानसाय विराजमूर्तये मेघात्मने श्रीम नरसिंहवपुषे नमः
ॐ चतुरात्मने नमः
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये भूतभविष्यत् तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
ॐ महेशाय नमः
अनेकमन्त्रनादमञ्जुनूपुरारवस्खलत्समाजराजहंसवंशणिक्वाणातिगौरवे। विलोलहेमवल्लरीविडम्बिवारुचङ्क्रमे कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्षभाजनम्॥
इरचेवि हलयुम सेव्वाळ इयलपुडन काक्क वायकै