शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
माँ दुर्गा मंत्र
उपैतु मां देवसखः कीर्तिश्च मणिना सह। प्रादुर्भूतोऽस्मि राष्ट्रेऽस्मिन् कीर्तिमृद्धिं ददातु मे॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारकीर्ति-ऋद्धि मंत्र
स्वरूपमहालक्ष्मी
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
देवसखा (कुबेर) और कीर्ति मणियों के साथ आएं। मैं इस राष्ट्र में उत्पन्न हुआ हूँ, मुझे यश और समृद्धि दें।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
ख्याति, मणि (रत्न) प्राप्ति
विस्तृत लाभ
ख्याति, मणि (रत्न) प्राप्ति।
जप काल
आभूषण धारण करते समय।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ नमो भगवते आञ्जनेयाय महाबलाय स्वाहा॥
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ॐ विष्णुवल्लभाय नमः
ॐ वेदगर्भाय नमः
ॐ कृष्णसङ्गविलासिन्यै नमः
अवतु माम् ॥ अवतु वक्तारम् ॥ अवतु श्रोतारम् ॥ अवतु दातारम् ॥ अवतु धातारम् ॥ अवानूचानमव शिष्यम् ॥ अव पश्चात्तात् ॥ अव पुरस्तात् ॥ अवोत्तरात्तात् ॥ अव दक्षिणात्तात् ॥ अव चोर्ध्वात्तात् ॥ अवाधरात्तात् ॥ सर्वतो मां पाहि पाहि समन्तात् ॥